Bhopal News: आईएसबीटी में वर्मा ट्रेवल्स का दबदबा: आठ बसों में आग के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
राजनीतिक क्रांति, भोपाल
राजधानी भोपाल में करीब 48 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) में बसों की पार्किंग, यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि वर्मा ट्रेवल्स की बसें लंबे समय तक परिसर में खड़ी रहती हैं, जबकि यात्रियों को टर्मिनल के भीतर से बैठाने के बजाय मुख्य सड़क के पास से सवार किया जाता है। रविवार रात कंपनी की आठ बसों में आग लगने की घटना ने इन अव्यवस्थाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। सीसीटीवी फुटेज में शाम 7:04 बजे एक खड़ी बस में अचानक धमाके के बाद आग लगती दिखाई देने की बात सामने आई है। आग की वजह अब तक स्पष्ट नहीं है। बंद बस में आग की शुरुआत कैसे हुई, दूसरी बसों को समय रहते क्यों नहीं हटाया जा सका और अग्निशमन इंतजाम कितने प्रभावी थे, इन बिंदुओं पर जांच की जरूरत है।
आईएसबीटी से करीब 400 बसों का संचालन होने की जानकारी दी जा रही है, लेकिन अनुरक्षण शुल्क की वसूली रोजाना केवल 100 से 125 बसों से होने की बात सामने आई है। एक बस से 40 रुपए शुल्क लिया जाता है। ऐसे में बसों की वास्तविक आवाजाही और निगम के राजस्व का हिसाब भी सवालों के घेरे में है। बताया गया है कि वर्मा ट्रेवल्स की 100 से अधिक बसें टर्मिनल से संचालित होती हैं। कंपनी के संचालक दीपक वर्मा से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
धमाके के बाद आग, लेकिन वजह अब भी साफ नहीं
सीसीटीवी फुटेज में खड़ी बस में अचानक धमाके के बाद आग लगती दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। करीब 15 मिनट बाद वर्मा ट्रेवल्स का स्टाफ चाबियां लेकर पहुंचा। तब तक आठ बसें आग की चपेट में आ चुकी थीं। तीन बसों को स्टार्ट कर हटाने की कोशिश की गई, लेकिन वे चालू नहीं हुईं। लोगों ने धक्का देकर उन्हें आग से दूर किया। बसों के स्टार्ट नहीं होने की वजह और आग लगने के शुरुआती क्षणों में बचाव की कोशिशों में हुई देरी की जांच जरूरी है।
घटनास्थल के पास पानी की उपलब्धता और अग्निशमन उपकरणों को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया गया कि करीब 100 मीटर दूर स्थित फायर स्टेशन से दमकलों को पहुंचने में लगभग 15 मिनट लगे। यह भी जांच का विषय है कि टर्मिनल में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और बसों के बीच पर्याप्त दूरी रखी गई थी या नहीं। आग लगने के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस और संबंधित एजेंसियों की जांच रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
टर्मिनल के भीतर बसें, सड़क पर यात्री
अन्य बस ऑपरेटरों ने आरोप लगाया है कि वर्मा ट्रेवल्स के कार्यालय के आसपास मुख्य सड़क तक लगेज और पार्सल रखे जाते हैं। इससे आवाजाही प्रभावित होती है। यह भी आरोप है कि कई बसें आईएसबीटी के भीतर आने के बजाय बाहर से ही यात्रियों को बैठाकर रवाना हो जाती हैं। इससे दूसरी कंपनियों की बसों को परिसर में जगह मिलने में परेशानी होती है और यात्रियों को सड़क के पास से बस पकड़नी पड़ती है। सड़क पर बसों के रुकने और पार्सल रखे होने से यातायात बाधित होने तथा हादसों का खतरा बना रहता है।
इनका कहना है…
आईएसबीटी की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। सड़क पर यात्रियों को बैठाने वाले बस ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी ऐसी शिकायतें परिवहन विभाग को नहीं मिली हैं।
