MP News: तकनीक के जरिए मध्य प्रदेश में पुलिसिंग में बदलाव
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MP News: तकनीक के जरिए मध्य प्रदेश में पुलिसिंग में बदलाव

भोपाल। राजनीतिक क्रांति

मध्य प्रदेश पुलिस के स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एससीआरबी) किस तरह डिजिटल क्रिमिनल जस्टिस इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, इस बारे में एससीआरबी का नेतृत्व कर रहे एडीजी जयदीप प्रसाद ने बताया।

मध्य प्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एससीआरबी) के नेतृत्व में डिजिटल पुलिसिंग के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में उभरकर सामने आया है। पिछले एक दशक में एससीआरबी केवल सॉफ्टवेयर लागू करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया है, जो पुलिस थानों, अदालतों, अभियोजन, जेलों, फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, अस्पतालों और नागरिकों को सुरक्षित और रियल-टाइम सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से जोड़ता है। राष्ट्रीय क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) और इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के तहत राज्य ने पुलिसिंग को ई-कोर्ट्स, ई-प्रॉसिक्यूशन, ई-प्रिजन्स, ई-फॉरेंसिक्स और मेडलीएपीआर से जोड़ा है। इससे आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय संभव हुआ है और काम की पुनरावृत्ति कम हुई है।

इस व्यवस्था की नींव सीसीटीएनएस पर आधारित है, जो अब 1,117 पुलिस थानों और 693 वरिष्ठ पुलिस कार्यालयों में संचालित है। एससीआरबी ने चरणबद्ध और जोखिम कम करने वाला दृष्टिकोण अपनाया। वर्ष 2025 में देवास को आईसीजेएस के डिजिटल एकीकरण के लिए मॉडल जिला बनाया गया, जिससे पूरे प्रदेश में लागू करने से पहले कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सके। जिला स्तर की समन्वय समितियां, जिनकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक करते हैं और जिनमें न्याय प्रणाली से जुड़े सभी हितधारक शामिल होते हैं, प्रगति की निगरानी करती हैं और विभागों के बीच आने वाली समस्याओं का समाधान करती हैं। वर्ष 2025 और 2026 में आयोजित दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय आईसीजेएस कार्यशालाओं में पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बताया गया कि देश में अपनी तरह की यह पहली संयुक्त समीक्षा थी, जिसका उद्देश्य एक साझा रोडमैप तैयार करना था।