इजराइल ने आरएसएस के ‘परम वैभव’ विजन को सराहा, यानिव रेवाच बोले- आरएसएस के विजन में उन्हें कोई संदेह नहीं
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इजराइल ने आरएसएस के ‘परम वैभव’ विजन को सराहा, यानिव रेवाच बोले- आरएसएस के विजन में उन्हें कोई संदेह नहीं

नागपुर/नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। भारत की सभ्यतागत पहचान, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भविष्य की वैश्विक उम्मीदों को एक अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है। इजराइल ने भारत के विकास और राष्ट्र-निर्माण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ऐतिहासिक योगदान की खुलकर सराहना की है। मिड-वेस्ट इंडिया के लिए इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने नागपुर में संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित वार्षिक विजयादशमी उत्सव में भाग लिया था।

दरअसल, इस दौरे के बाद उन्होंने न केवल संघ के संस्थापकों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि खुले तौर पर घोषणा की कि भारत को ‘परम वैभव’ (परम गौरव) के शिखर पर ले जाने के आरएसएस के विजन में उन्हें कोई संदेह नहीं है। यह पहला मौका है जब किसी प्रमुख विदेशी राजनयिक ने संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के मंच से भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका को ‘बेमिसाल’ बताते हुए वैश्विक पटल पर इसकी गूंज बढ़ाई है।

100 साल के सफर का साक्षी बना इजराइल

उल्लेखनीय है कि कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच का यह नागपुर दौरा रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विजयादशमी उत्सव (20 अक्टूबर 2026) के भव्य आयोजन में शामिल होने के बाद, रेवाच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने गहरे अनुभव साझा किए। उन्होंने इस निमंत्रण को अपने जीवन का एक अत्यंत विशिष्ट और अनूठा अवसर बताया।

यह आयोजन इसलिए भी खास था क्योंकि यह संगठन के 100 वर्ष पूरे होने और उसके 101वें वर्ष में कदम रखने का प्रतीक था। रेवाच ने कहा कि एक ऐसे संगठन के शताब्दी वर्ष का गवाह बनना जो भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का मूल आधार रहा है, उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने नागपुर के रेशमीबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर का भी दौरा किया, जहां उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर (श्री गुरुजी) की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके साथ ही उन्होंने संघ की ‘शाखा’ पद्धति और उसके अनुशासन को करीब से देखा।