Bhopal News: आग में आठ बसें जलीं, तब जागा निगम: आईएसबीटी में तीन महीने से खड़ी 24 बसें हटाईं, वर्मा ट्रेवल्स की 11 बसें शामिल
भोपाल. इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) में आगजनी की घटना के बाद नगर निगम ने लंबे समय से खड़ी गैर-संचालित बसों को हटाने की कार्रवाई शुरू की है. बुधवार को निगम के अमले ने परिसर से 24 बसें हटाईं. इनमें अकेले वर्मा ट्रेवल्स की 11 बसें शामिल हैं, जबकि माला ट्रेवल्स की एक बस जब्त की गई. इस पर पांच हजार रुपए का जुर्माना प्रस्तावित है. आईएसबीटी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर गैर-संचालित बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. हालांकि, कार्रवाई के साथ ही कई सवाल भी खड़े हो गए हैं. तीन महीने से खड़ी बसों का किराया कितना बकाया है, अब तक इन्हें हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यात्रियों की जगह पर पार्सल रखने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे?
करीब 48 करोड़ रुपए की लागत से बने आईएसबीटी में लंबे समय से खड़ी बसों को हटाने की कार्रवाई उस समय हुई है, जब आग में वर्मा ट्रेवल्स की आठ बसें जलकर खाक हो गईं. नगर निगम का मानना है कि गैर-संचालित बसों को पहले ही हटाया जाता तो आगजनी के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती थी. हालांकि, आग में नुकसान बढ़ने के कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही होगी.
तीन महीने का किराया, वसूली कितनी
नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने मंगलवार को आईएसबीटी का निरीक्षण कर लंबे समय से खड़ी गैर-संचालित बसों को हटाने के निर्देश दिए थे. साथ ही बस संचालकों को नोटिस जारी कर जुलाई 2026 से अब तक का किराया वसूलने को कहा था. अब सवाल यह है कि 24 बसों के संचालकों पर कुल कितना किराया बकाया है और इसमें वर्मा ट्रेवल्स की हिस्सेदारी कितनी है.
निगम की ओर से बकाया राशि का विस्तृत आंकड़ा सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बस संचालकों से कितनी वसूली की जानी है. यह भी देखना होगा कि नोटिस में भुगतान की समयसीमा तय की गई है या नहीं. यदि तय समय में किराया जमा नहीं होता है, तो निगम आगे क्या कार्रवाई करेगा. फिलहाल बसों को हटाने की कार्रवाई के साथ बकाया वसूली की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो गई है.
आग के समय कितने सुरक्षित थे इंतजाम
आगजनी के बाद आईएसबीटी की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान फायर हाइड्रेंट लगाने और विद्युत वायरिंग की जांच कराने के निर्देश दिए थे. इससे यह सवाल उठता है कि परिसर में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम पहले से उपलब्ध थे या नहीं. यदि फायर हाइड्रेंट लगे थे, तो क्या वे चालू हालत में थे? आग लगने के समय दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में कोई परेशानी हुई थी या नहीं?
